“तो पूरी रात… आपके साथ जागूँगा।”
भाभी ने आँखें बंद कर लीं।
उनके माथे पर रोहन का हल्का चुंबन—
धीमा,
गर्म,
गहरा।
भाभी की उंगलियाँ
रोहन की गर्दन पर टिक गईं।
बर्थ छोटी थी,
लेकिन उस छोटी जगह में
दो दिलों की दूरी पूरी तरह मिट चुकी थी।
भाग 7 — सुबह की रोशनी और एक नया रिश्ता
सुबह 5 बजे ट्रेन प्लेटफॉर्म पर पहुँची।
भाभी अभी भी रोहन के कंधे पर सिर रखे थीं।
सुबह की हल्की धूप में
उनके चेहरे का सुकून कुछ और ही था।
रोहन ने धीरे से उन्हें जगाया—
“स्टेशन आ गया भाभी…”
अन्वी मुस्कुराकर बोलीं—
“इतनी आराम से… बहुत समय बाद सोई हूँ।”
रोहन ने कहा—
“मेरे साथ… फिर कभी सफ़र करोगी?”
भाभी ने गहरी सांस लेकर कहा—
“सफ़र? रोहन…
अब तो शायद रिश्ता भी…”
रोहन ने उनका हाथ पकड़ा।
भाभी ने हाथ छोड़ा नहीं—
बल्कि और कसकर पकड़ लिया।
प्लेटफ़ॉर्म की भीड़ में
दोनों साथ निकले—
ट्रेन की रात
अब दो दिलों की सुबह बन चुकी थी।
“तो पूरी रात… आपके साथ जागूँगा।”
भाभी ने आँखें बंद कर लीं।
उनके माथे पर रोहन का हल्का चुंबन—
धीमा,
गर्म,
गहरा।
भाभी की उंगलियाँ
रोहन की गर्दन पर टिक गईं।
बर्थ छोटी थी,
लेकिन उस छोटी जगह में
दो दिलों की दूरी पूरी तरह मिट चुकी थी।
भाग 7 — सुबह की रोशनी और एक नया रिश्ता
सुबह 5 बजे ट्रेन प्लेटफॉर्म पर पहुँची।
भाभी अभी भी रोहन के कंधे पर सिर रखे थीं।
सुबह की हल्की धूप में
उनके चेहरे का सुकून कुछ और ही था।
रोहन ने धीरे से उन्हें जगाया—
“स्टेशन आ गया भाभी…”
अन्वी मुस्कुराकर बोलीं—
“इतनी आराम से… बहुत समय बाद सोई हूँ।”
रोहन ने कहा—
“मेरे साथ… फिर कभी सफ़र करोगी?”
भाभी ने गहरी सांस लेकर कहा—
“सफ़र? रोहन…
अब तो शायद रिश्ता भी…”
रोहन ने उनका हाथ पकड़ा।
भाभी ने हाथ छोड़ा नहीं—
बल्कि और कसकर पकड़ लिया।
प्लेटफ़ॉर्म की भीड़ में
दोनों साथ निकले—