आशा है कि आपने पिछली कहानी में पढ़ लिया होगा कि कैसे सोनू काव्या को अपने बातों के जाल में उलझाता है और उसके साथ अपने मन की मुराद पूरी करने की कोशिश करता है, तभी मोहन चाचा ट्यूबवेल वाले रूम के खिड़की पर आ जाते हैं और अन्दर का नजारा देख वो चौंक जाते हैं। आगे की कहानी पढ़िए-
मोहन चाचा ने पहली बार इतनी जबरदस्त जवान माल देखा था, जिसके बड़े-बड़े चूतड़ हो और बड़े-बड़े गोरे गोरे दूध, चिकनी गुलाबी चूत, रसीले होंठ, गठीले बदन और मांसल मोटे जांघ जिसे देख अच्छों अच्छों का लंड पानी फेंक दे।
ये देख चाचा अचंभित हो गए थे कि ऐसी कौन सी छमिया हमारे गांव में है जिसे हम नहीं देख पाए। ये सब मन ही मन मोहन चाचा सोच रहे थे। तभी लाखन चाचा बोले, “यार मोहन ये अपने गांव की मालूम नहीं पड़ती। ये किसी दूसरे गांव की छोरी है। वरना हम दोनों तो अब तक इस छमिया को देख चुके होते।”
मोहन: कुछ भी हो भाई, पर माल तो मस्त है। बस एक बार इसको चोदने का मौका मिल जाए तो जन्नत नसीब हो जाएगा।
दोनों हंसने लगते है और बोलते हैं कुछ भी हो एक बार चुदने को तैयार हो जाए तो जन्नत तो नसीब हो ही जाएगा।
इधर जब सोनू को पता लग जाता है कि कोई बाहर आ गया था, तो वो बिना मौका गंवाए अपने मन की मुराद पूरी करने के लिए बेताब हो जाता है। पर आदत से मजबूर शायरी करना नहीं छोड़ पाता। पर सोनू ने काव्या को कुतिया बनाया और पीछे से काव्या की चूत चाटना शुरू कर देता है।
तुझे कुतिया बनाऊंगा, घोड़ी बनाऊंगा।
अपना लंड का तुझे हमजोली बनाऊंगा।
तेरी चूत को चाटूंगा, फिर तेरा कद्दू मैं काटूंगा।
रसीले दूधों को तेरे मैं अपने दांतो से काटूंगा।
ये सब बोलते-बोलते सोनू काव्या की चूत चटर-चटर कर चाटने लगता है और अपने जीभ से काव्या की चूत चोदने लगता है। जिस वजह से कुछ ही देर में मेरी खूबसूरत बहन जल्दी से लंड खाना चाहती थी। वो “…..ही ही ही ही ही…….अहह्ह्ह्हह उहह्ह्ह्हह….. उ उ उ…” बोल कर चिल्ला रही थी। सोनू की जीभ मेरी बहन की चूत पर हर जगह इधर-उधर घूम रही थी। उसे मेरी बहन की बुर चाटने में जन्नत का मजा मिल रहा था। “आई…..आई….. अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….हा हा हा.. सोनू चाचा …..चोदोदोदो…..मुझे कस कर चोदो दो दो दो दो” काव्या चिल्लाने लगी। ये सिसकारियां सुन उसने फिर बोला कि,
तेरी नजाकत भरी सिसकारियां आज पूरे खेतों में गूंजेगी।
मेरी रानी जब तू आज मेरे लंड के झटकों को झेलेगी।
मेरी बहन काव्या की चूत इतनी टाईट थी जैसे की चूत पूरी तरह से बंद हो और सील पूरी तरह से बंद हो। सोनू जब जान गया की अब काव्या चुदने को पूरी तरह से तैयार थी। उसने उसके दोनों पैर खोल दिए और अपने लंड को वो फेटने लगा और ताव देने लगा।
तेरी इस रसीली चूत को अब मेरे लंड की आदत हो जाएगी।
मेरे लंड से ठुकने के लिए तेरी चूत इबादत करने लग जाएगी।
कुछ देर में सोनू का लंड 7” लम्बा हो गया और तन कर खड़ा हो गया। उसने अपने लंड को हाथ से पकड़ कर मेरी खूबसूरत बहन की चूत पर लगा दिया और लंड से काव्या के चूत के दाने को घिसने लगा। काव्या तड़प रही थी। सोनू बार-बार अपने लौड़े से मेरी बहन के चूत के दाने को घिस रहा था। ऐसा करने से काव्या को बहुत जोर की चुदास लग रही थी।
रूक जा मेरी रानी आज मैं तेरी चुदासी दूर कर दूंगा,
देखना तेरी चूत को रोज चुदने को मैं मजबूर कर दूंगा।
कुछ देर बाद सोनू ने अपने लंड का सुपाडा काव्या की चूत पर रख दिया और जोर का धक्का मारा। काव्या की सील तो मैंने पहले ही तोड़ दिया था ऊपर से गज्जू भी ताबड़-तोड़ चोद चुका था। तो सील तो पहले टूट गयी थी, पर दर्द तो होना ही था।
सोनू भैया का 7″ लम्बा लौड़ा मेरी बहन की कुवारी चूत में गच्च से अंदर उतर गया काव्या की चीख अहहह्ह्ह्हईईईइ ….अअअअअ …हा …हा हा निकल गई और मुंह खुल गया, तो सोनू व्यंग्य बोला, उफ्फ मेरा लंड हचाक से तुम्हारी चूत में घुस गया,
देख मेरी काव्या रानी तेरा मालिक अब खुश हो गया
तू उह आह उह आह करेगी तो तुझे जोर से चोदूंगा
शान्ति से मेरे झटके सहेगी तो मैं तुझे जल्दी छोडूंगा।
ये सुन काव्या उह आह उह आह की आवाज निकालती पर मुंह के अन्दर दबाने का प्रयास करती। पर तब तक हचाक से खूब तेज जोर लगा कर सोनू चूत में अपना मोटा लंड ठेल देता, तो काव्या चीख उठती। वो मेरी हसीन माल जैसी बहन को जोर-जोर से चोदने लगा और उसके जिस्म से खेलने लगा।
काव्या “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ.. हमममम अहह्ह्ह्हह.. अई… अई… अई…..” करके चिल्ला रही थी। सोनू ने मेरी बहन की दोनों टांगो को खोल दिया था और जल्दी-जल्दी काव्या की चूत में लौड़ा दे रहा था, और जोर-जोर से बोल रहा था।
मेरा लौड़ा आज तुम्हारी चूत खोद कर गड्ढा बनाएगा
देखना तेरी चूत में फिर कैसे अपना बीज डालेगा।
वो बहुत जल्दी-जल्दी मेरी खूबसूरत बहन को चोद रहा था और उसकी जवानी का सारा रस लूट रहा था। मेरी बहन आज कस के चुद रही थी। सोनू का लौड़ा बहुत मोटा था और वो जल्दी-जल्दी अपनी कमर हिला-हिला कर मेरी बहन को चोद रहा था। काव्या के चूचे भी तेज-तेज ऊपर-नीचे होते हुए उछल रहे थे।
तुझे लंड पर नचाऊंगा तो तेरी चूचियां उछल कर मुझे सलाम करेगी
अब तू रोज आएगी मेरे ही लंड पर, तू हर पल मुझे ही याद करेगी।
तेरी चूत का दरवाजा बड़ा बनाऊंगा, मैं अब तुझे रोज बजाऊंगा।
तू मेरे लौड़े के लिए भागती आएगी, मैं तुझे रोज चोद कर रंडी बनाऊंगा।
सील को तोड़ा मैंने, चूची निचोड़ा मैंने।
दूध ना निकला तो चूची को चूमा मैंने।
ये सब कहते हुए सोनू काव्या को जबरदस्त तरीके से चोद रहा था, और वो गांव के चाचा चुप-चाप खड़े होकर दीवार पर जहां ईंट नहीं था उस छेद से देख रहे थे। पर कुछ देर में जब वो दोनों गरमा गर्म चुदाई का मजा ले रहे थे, तो वो चाचा ध्यान से पहचानने का प्रयास कर रहे थे कि आखिर लड़की कौन थी। पर लड़की का चेहरा सही से देख नहीं पाए थे।
मसला तो तब हुआ जब गाँव के एक चाचा ने खेतों के बीच बने ट्यूबवेल वाले घर में ही मेरी जवान बहन को सोनू से बेदर्दी से चुदते हुए देख लिए। सोनू ने काव्या को चोदते-चोदते जैसे ही थोड़ा घुमाया, चाचा देख कर पहचान गए कि वो मेरी बहन की बुर चोद कर जन्नत के मजे ले रहा था।
आज तक चाचा को भी इतनी खूबसूरत लड़की को चुदते देखने का मौका नहीं मिला था, और ना ही चोदने का कभी मौक़ा मिला था। तो उनके दिमाग में भी काव्या को चोदने के ख्याली पुलाव चलने लगे थे।
पर इधर सोनू झटके पर झटके-झटके पर झटके मारे जा रहा था। काव्या की चूत पर सोनू के लंड टकराने से पट पट पट पट चट चट चट चट की आवाज तेजी तेजी से आती है जो उन दोनों चाचा के मुंह मे काव्या की जवानी चखने के लिए पानी ला देता है, और दोनों आपस में बात करते हैं।
लाखन सिंह: अरे मोहन भाई ये तो अपने ही गांव के राजू की छोट की बहिनिया है।
मोहन: हां लाखन भैया, ये दोनों अभी कुछ देर पहले सरसो के खेत में दौड़ रहे थे। राजू को बता दिया जाए क्या, कि तोहार बहिन को गांव का सोनू बजावत है।
लाखन: अरे काहे भैया, इतना खूबसूरत छमिया तो हम कभी देखले ना हैं, अरे देखने दो, का चुद रही है साली।
मोहन: अरे देखने से काम नहीं चलेगा। अब तो हम लोग भी चोदेंगे इस छमिया को।
लाखन: मोहन भाई किसी को फोन नहीं करो। पहले हम सब बजाएंगे, उसके बाद बताएंगे। साली क्या गदराई जवान लड़की है। चूचे तो देखो साली के कैसे ऊपर-नीचे हो रहे हैं।
मोहन: ठीक है भाई अब हम सब भी चोदेंगे। पर लाखन भाई तुम्हार तो झेल ही नहीं पाएगी ये छमिया।
लाखन: अरे नहीं भाई एक बार मिल जाए चोदने को तो ठूंस दूंगा उसकी चूत में अपना लंड। फिर चाहे चूत फट ही ना जाए उसका, पर चोदूंगा जरूर साली रंडी को।
मोहन: भाई इन दोनों को ऐसे चोदते-चुदवाते देख अब मुझसे रहा नहीं जा रहा भाई। अब मेरा लंड काबू में नहीं है।
लाखन: भाई लंड तो मेरा भी अब इसके चूत में घुसने के लिए बेताब है, और अब तो जब तक इसके चूत में घुस नहीं जाएगा तब तक शान्त नहीं होगा।
मोहन: हां भाई चल अब खेल शुरू करते हैं। पर इस बात का ध्यान रखते हैं कि उन दोनों को बिना पता चले हम उन्हे रंगे हाथ पकड़ते हैं तो ही मौका मिलेगा चोदने का।
और फिर आपस में कुछ बात करते हैं।
आखिर वो चाचा क्या कदम उठाएंगे? क्या वो सोनू को रोकेंगे और खुद चोद पाएंगे? जानने के लिए बने रहें अपने दोस्त राजू के साथ।
