गर्भधारण, प्रेग्नेंसी और बच्चे के जन्म से जुड़ी बातें हमेशा से दुनिया भर में रिसर्च का बड़ा विषय रही हैं. ख़ासकर बच्चे के जन्म से पहले उसकी सुरक्षा को लेकर वैज्ञानिक लगातार नई जानकारी जुटाने की कोशिश करते हैं. प्रेग्नेंसी के दौरान महिला को कई तरह की दवाइयां दी जाती हैं. लेकिन ये दवाइयां मां और गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं या नहीं, इसकी पूरी जानकारी डॉक्टरों और वैज्ञानिकों के पास अक्सर नहीं होती.इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटा का सीधे अध्ययन करना आसान नहीं होता.इसी समस्या का हल निकालने के लिए आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च ऑन विमेन्स हेल्थ और आईआईटी बॉम्बे के वैज्ञानिकों ने ‘प्लेसेंटा ऑन ए चिप’ नाम की एक नई तकनीक विकसित की है. यह प्रयोगशाला में इंसानी प्लेसेंटा के अहम कामों की नक़ल करती है.
प्रेग्नेंसी में ली गई दवाइयां क्या बच्चे तक पहुंचती हैं? भारत में चल रहा एक्सपेरिमेंट देगा जवाब